धंधे की बात
कपड़ा उद्योग में गलाकाट प्रतिस्पर्धा के चलते उद्यमी फैशन और
गुणवत्ता को लेकर विकल्प तलाशने में जुटे हुए हैं। ऐसे में इनके लिए बेहतर
विकल्प के रूप मे उभर रहा है जैव (ऑर्गेनिक) टेक्सटाइल। इसकी घरेलू के साथ
विदेशों में भी मांग बढ़ रही है। ऐसे में टेक्सटाइल उद्यमियों का रुझान
ऑर्गेनिक परिधानों की तरफ होना शुरू हो गया है। हालांकि टैक्सटाइल कारोबार में
5 फीसदी हिस्सेदारी के साथ इसका मामूली बाजार है। पर इसके कारोबार में सालाना
15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी इसके अच्छे भविष्य का संकेत दे रही है।
टेक्सटाइल उद्यमियों के लिये ऑर्गेनिक परिधानांे का कारोबार कई तरह से बेहतर
विकल्प के रूप में उभर रहा है। ऑर्गेनिक परिधानों की कीमत आम परिधानांे के
मुकाबले 25 से 30 फीसदी अधिक होती है। इन पर उत्पादन लागत आम परिधानांे की तुलना
मे 10 से 15 फीसदी अतिरिक्त होती है। ऑर्गेनिक कपास के भाव भी 5 से 7 फीसदी तक
ज्यादा होते हैं। कंपनियां इन दिनों बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए ऑर्गेनिक
उत्पादों को बाजार में तेजी से उतारने में जुटी हैं। डयूक कंपनी के कार्यकारी
निदेशक कुंतल जैन के मुताबिक उन्होंने इस बार गर्मियांे के सीजन के लिए
ऑर्गेनिक टी- शर्ट बाजार में उतारी हैं, जिनकी कीमत 695 रुपये से 795 रुपये के
बीच हैं । जबकि सामान्य टी-शर्ट की कीमत 495 रुपये से लेकर 695 रुपये है।
ऑर्गेनिक परिधानों का निर्यात बाजार तेजी से बढ़ रहा है। जापान, अमेरिका और
यूरोपीयन देश ऑर्गेनिक धागा, ऑर्गेनिक कपड़ा और ऑर्गेनिक रडीमेड गारमेंट्स की
काफी मांग कर रहे हैं। हालांकि ऑर्गेनिक उत्पादों के निर्यात के लिए जरूरी है
कि कंपनी ग्लोबल टेक्सटाइल स्टैंडर्ड (गोट्स) के नियमों के तहत होनी चाहिए। देश
में ऑर्गेनिक उत्पाद 15 फीसदी तक की दर से बढ़ रहा है। देश में जितनी भी
ऑर्गेनिक कपास का उत्पादन हो रहा है उसका पूरा उपभोग किया जा रहा है। नाहर
ग्रुप करीब 50 करोड़ रुपये का ऑर्गेनिक उत्पाद निर्यात कर रहा है, जिसमें धागा
व कपड़ा शामिल है। वर्धमान ग्रुप भी यूरोपीयन देशों को ऑर्गेनिक धागा निर्यात
कर रहा है।
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